१.
शकील बदायुनीच्या एका प्रसिद्ध गझलेची 'हमरदीफ़' गझल लिहिण्याचा प्रयत्न. शेवटच्या शेरामध्ये त्या शायरचे नाव तसेच ठेवले आहे.
दिल-ए-नादाँ तेरे हालात पे रोना आया
दर्दो ग़मसे भरे, जज़बात पे रोना आया
या मुकद्दर था, मजबूरी थी, या था उनका फरेब
बेबसी के इस एहसासपे रोना आया |
बेवफा हो ना सके, और वफा निभा ना सके
बेवफाईके इक इलजामपे रोना आया |
गैर के गमको अपनाना आसाँ है 'शकील'
हमको अपनीही गमगीनी पे रोना आया |
- नरेंद्र जोशी.
२.
दिल पे अफसाना तुम्हारा ही लिखा रखा है
ख्वाब आँखोंमें तुम्हारा ही छुपा रखा है.
ढुंढता हूँ तुझे हर राह में, हर मेहफिल में.
तुम बसी रहती हो मेरेही दिल की धडकन में.
दर्द सीने में तुम्हारा ही बसा रखा है
जिंदगी मेरी तुम्हारी ही अमानत है
हर ख़ुशी मेरी, तुम्हारी ही बदौलत है
दिल मेरा आशिक तुम्हारा ही बना रखा है
- नरेंद्र जोशी.
३.
शिकायत क्या करें किसकी, मुहब्बत हमनें ही की थी.
हमीनें दिल लगाया था, हमीनें आरजू की थी .
हम ही मदहोश थे पीकर, शराबे गम का पयमाना
किसीसे क्या गिला जब गम की आंधी खुद चलायी थी
नही फरियाद कोई भी, किसीसे भी नही शिकवा
हमीने अपने हाथोंसे तबाही खुद पे लायी थी .
हुआ घायल ये दिल तो क्या, जलाया अशियां तो क्या
हमीने भरके दामनमे कई चिंगारीयां ली थी .
- नरेंद्र जोशी.
4.
है एक यही तमन्ना, दीदार ए यार हो जाये
कहीं ऐसा ना हो, हमको दुश्मनसे प्यार हो जाये ।
गुलशनमे मेरे दिल के, मौसम है अब खिजा का
ऐसे में वो मिले तो, शायद बहार आ जाये ।
करवट बदल बदलके रातें गुजारते हैं
आहट अगर हो उनकी, दिलको करार आ जाये ।
फरियाद कर रही है, हसरत भरी निगाहें
डर है के हमको, गमें इंतजार मिल जाये ।
- नरेंद्र जोशी
5.
दिलसे तेरी यादके साये को, हमसे मिटाया ना जायेगा
उल्फतके कस्मे वादॊको हमसे भुलाया ना जायेगा ।
वो दर्द मुझे तुमने जो दिये, समझा मैं तेरी मेहेरबानी थी
शिकवा ना किया कोई हमने, शायद वो तेरी बदनामी थी
जलता है शरारा सीनेमे, हमसे बुझाया ना जायेगा ।
कभी था मैं तेरा मंजूर ए नज़र, हूँ आज मगर बेगानासा
कभी था मैं तेरा दिलो दिलबार, हूँ आज मगर अंजानासा
है बोझ गमोंका अब दिलपे, हमसे उठाया ना जायेगा ।
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